बंसी बजैया,
माखन चुरैया,
रास रचैया,
नटखट कन्हैया।
जय-जय कन्हैया,
जय-जय कन्हैया।
श्याम स्वरूप लिए मनमोहन,
मोर-मुकुट सिर पर साजे।
नैनों में प्रेम की ज्योति जले,
अधरों पर मुरली विराजे।
बंसी बजैया,
माखन चुरैया,
रास रचैया,
नटखट कन्हैया।
जय-जय कन्हैया,
जय-जय कन्हैया।
कालिया के फन पर नाच दिखाएँ,
एक उँगली पर गिरिराज उठाएँ।
गोपियों संग रास रचाएँ,
ब्रज में रंग-गुलाल उड़ाएँ।
बंसी बजैया,
माखन चुरैया,
रास रचैया,
नटखट कन्हैया।
जय-जय कन्हैया,
जय-जय कन्हैया।
सुदामा से मित्रता निभाएँ,
सच्चे प्रेम का पाठ पढ़ाएँ।
ऊँच-नीच का भेद मिटाकर,
सबको प्रेम की राह दिखाएँ।
बंसी बजैया,
माखन चुरैया,
रास रचैया,
नटखट कन्हैया।
जय-जय कन्हैया,
जय-जय कन्हैया।
द्रौपदी की लाज बचाएँ,
पांडवों को राह दिखाएँ।
अर्जुन के सारथी बनकर,
गीता का संदेश सुनाएँ।
बंसी बजैया,
माखन चुरैया,
रास रचैया,
नटखट कन्हैया।
जय-जय कन्हैया,
जय-जय कन्हैया।
मन-मंदिर में आन विराजो,
अपनी कृपा हम पर बरसाओ।
चरणों में अपने स्थान दिलाकर,
जीवन की नैया पार लगाओ।
बंसी बजैया,
माखन चुरैया,
रास रचैया,
नटखट कन्हैया।
जय-जय कन्हैया,
जय-जय कन्हैया।