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ऐ वक़्त ,रुक जा ज़रा

ऐ वक़्त, रुक जा ज़रा,
मुझे निहार लेने दे।
मेरे महबूब को,
दिल में उतार लेने दे।

इतनी जल्दी मत जाने दे,
मेरे महबूब को मुझसे दूर,
कुछ पल उसे पास रहने दे,
कुछ पल प्यार के बिताने दे।
कुछ मैं बोलूँ उसे,
कुछ वो बोले मुझको,
इस पल को दिल में,
हमेशा के लिए समाने दे।

ऐ वक़्त, रुक जा ज़रा,
मुझे निहार लेने दे।
मेरे महबूब को,
दिल में उतार लेने दे।

वक़्त, तू क्यों दौड़ रहा,
करने दे इज़हार मुझे।
ठहर जा ज़रा,
कर लेने दे उसे भी इकरार।
उनके दीदार को तड़पता है दिल,
उनकी आवाज़ सुनकर मचलता है दिल।
बहक जाता है दिल मेरा,
जब देखूँ उनको सामने।
दिल कहता है—
बस आज की शाम ठहर जाए,
उनके संग ये पल गुज़र जाए।

ऐ वक़्त, रुक जा ज़रा,
मुझे निहार लेने दे।
मेरे महबूब को,
दिल में उतार लेने दे।

ऐ वक़्त, रुक जा ज़रा,
मुझे निहार लेने दे।
मेरे महबूब को,
दिल में उतार लेने दे।

ऐ वक़्त, रुक जा ज़रा,
ऐ वक़्त, रुक जा ज़रा…