ऐ हुज़ूर
ऐ हुज़ूर,
ज़रा थाम लीजिए दिल की धड़कनों को।
जल्दी क्या है—इज़हार-ए-मोहब्बत करने की?
ऐ हुज़ूर,
ज़रा थाम लीजिए दिल की धड़कनों को।
अभी नज़रों को बात करने दीजिए,
ख़ामोशियों को कुछ कहने दीजिए।
लबों तक बात आने में देर है—
ज़रा दिल को दिल से मिलने दीजिए।
ऐ हुज़ूर,
ज़रा थाम लीजिए दिल की धड़कनों को।
जल्दी क्या है—
इज़हार-ए-मोहब्बत करने की?
न हों इतने बेकरार,
कर लीजिए थोड़ा इंतज़ार।
अभी-अभी तो मिले हैं हम,
अभी-अभी अरमान जगे हैं।
अभी चाहत का सफ़र बाक़ी है,
दिल में कई राज़ दबे हैं।
ऐ हुज़ूर,
ज़रा थाम लीजिए दिल की धड़कनों को।
जल्दी क्या है—
इज़हार-ए-मोहब्बत करने की?
ऐ हुज़ूर…ज़रा थाम लीजिए दिल की धड़कनों को…ज़रा थाम लीजिए दिल की धड़कनों को…ऐ हुज़ूर… ऐ हुज़ूर…