लब खामोश हूँ

लब ख़ामोश हैं,
पर आँखों ने सब कह दिया।
नज़रों का तीर चला,
सीधा दिल को चीर गया।


आँखें कर रही हैं इशारा,
मन को मेरे बहका रही हैं।
पर दिल कहे—ज़रा रुक जा,
कहीं टूट न जाए ये भ्रम|


लब ख़ामोश हैं,
पर आँखों ने सब कह दिया।
नज़रों का तीर चला,
सीधा दिल को चीर गया |


इज़हार-ए-मोहब्बत,
करने को दिल बेकरार।
लबों पर ठहरी दिल की बात,
बस सुनने को तेरा इकरार|


लब ख़ामोश हैं,
पर आँखों ने सब कह दिया।
नज़रों का तीर चला,
सीधा दिल को चीर गया।


ख़त्म करो ये इशारों का खेल,
अब दिल की बात बता भी दो।
जो छिपा रखा है दिल में,
लबों से आज जता भी दो।


लब ख़ामोश हैं,
पर आँखों ने सब कह दिया।
नज़रों का तीर चला,
सीधा दिल को चीर गया।

लब ख़ामोश हैं…पर आँखों ने सब कह दिया…
लब ख़ामोश हैं…पर आँखों ने सब कह दिया…