कहाँ गया मेरा दिल ,
ढूँढूँ मैं उसको हर पल |
कोई तो बता दे ,
उसका पता |
कहाँ गया मेरा दिल ?
कहाँ गया मेरा दिल ?
देखा जब से उसको ,
भटक रहा है ये तब से |
चैन नहीं है अब तो ,
खोया रहता है बस ये |
कहाँ गया मेरा दिल ?
कहाँ गया मेरा दिल ?
जिस राह से वो गुज़रा ,
दिल भी वहीँ ठहर गया |
उसकी एक मुस्कान पर ,
सब कुछ मेरा बिखर गया |
कहाँ गया मेरा दिल ?
कहाँ गया मेरा दिल ?
क्या करूँ मैं ,
कि वो मिल जाए |
बिना उसके ,
दिल मेरा न लग पाए |
हर धड़कन बस उसका ,
नाम गुनगुनाए |
कहाँ गया मेरा दिल ?
कहाँ गया मेरा दिल ?
BEHIND THE SCENES:
“कहाँ गया मेरा दिल “मेरे दिल के सबसे क़रीब गानों में से एक है |
जिस दिन मैंने ये गण लिखा ,उस दिन मैं बिलकुल अकेली बैठी थी | मुझे अकेले बैठना कभी अच्छा नहीं लगता | उस दिन मन थोड़ा उदास था ,और वही एहसास शब्द बनकर इस गाने में उतर आए |
अकेले बैठे -बैठे मैं बस अपने पति और अपनी बेटी को याद कर रही थी | शायद इसलिए यह गाना सीधे मेरे दिल से निकला |
मैं यह गाना अपने पति और अपनी प्यारी बेटी को समर्पित करती हूँ |
उम्मीद है ,इस गाने की भावनाएँ आपके दिल को भी छू जाएँगी |