चलते-चलते
रुक गए कदम,
सुनी जो आहट उनके आने की,
ओ सनम।
धीरे-धीरे, चुपके-चुपके,
कब दिल ने दस्तक दी,
पता ही न चला ,
कब उनके दिल में जगह बना ली।
चलते-चलते
रुक गए कदम,
सुनी जो आहट उनके आने की,
ओ सनम।
बैठे हैं उनके दिल में,
पर उन्हें ख़बर नहीं।
प्यार तो है उनके दिल में ,
पर उनको एहसास नहीँ |
चलते-चलते
रुक गए कदम,
सुनी जो आहट उनके आने की,
ओ सनम।
दिल मेरा भागा जाए,
बस उनकी ओर।
समझाऊँ दिल को—“ऐ दिल, ज़रा संभल!”
पर उनकी एक झलक पाकर,
फिर भी ये मचला जाए।
चलते-चलते
रुक गए कदम,
सुनी जो आहट उनके आने की,
ओ सनम।
जाना है मुझकोअपनी राह पर,
पर दिल कहे—“ज़रा ठहर जा पलभर।”
शायद वो मुड़कर देख लें,
शायद पुकारें—“ओ सनम!”
चलते-चलते
रुक गए कदम,
सुनी जो आहट उनके आने की,
ओ सनम. …
चलते-चलते,
रुक गए कदम ,
सुनी जो आहट उनके आने की,
ओ सनम…