मैं हूँ परी ,
अपने पापा की परी |
उठाते वो सारे नखरे मेरे ,
छाँव में अपनी रखते घेरे |
सुबह उठाते ,
स्कूल ले जाते |
ऑफिस जाते ,
वापिस आकर खूब हँसाते |
रखते वो मेरा सदा ख़्याल ,
करते मुझसे वो बहुत प्यार |
मेरी हर छोटी – सी मुस्कान ,
उनके जीवन की है पहचान |
मेरे एक ग़म के बदले ,
ले लें वो गम हज़ार |
मेरी आँखों में आँसू न आए ,
रखते वो सदा ख्याल |
लोग कहते क्यों बनाते हो लाडली ,
एक दिन छोड़ के चली जाएगी तुम्हें , ओ बावरे |
न सुनते पापा किसी की ,
उनकी तो हूँ मैं परी |
हर धड़कन में बसती हूँ मैं ,
उनके जीवन की ख़ुशी |
कहने को तो परायी हुई ,
पर फिर भी उनके दिल में गहराई हूँ |
मेरी एक आवाज़ पर ,
आते वो सबसे पहले नज़र |
दूरी चाहे कितनी भी हो जाए ,
पापा का साया साथ ही नज़र आए |
दुनिया बदल जाए चाहे सारी ,
मैं आज भी हूँ उनकी प्यारी |
मैं हूँ परी ,
अपने पापा की परी |
आज भी हूँ उनकी लाडली ,
और रहूँगी उनकी जीवन भर परी |